भाषा किसे कहते है । परिभाषा और रूप

इस लेख में आप पढ़ेंगे: भाषा किसे कहते है, भाषा के कितने रूप होते है,भाषा की परिभाषा, तथा भाषा का महत्व क्या है

नमस्कार दोस्तों, Postalgyaan.In के एक नए लेख में आपका स्वागत है। आज की इस नए लेख में आप भाषा के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे। इसके पिछले लेख में आपने प्रकाश संश्लेषण के बारे में जाना था। तो आइए जानते है की भाषा किसे कहते है।

भाषा किसे कहते है भाषा की परिभाषा

भाषा किसे कहते है। Bhasha kise kahte hai

भाषा’ शब्द संस्कृत की ‘भाष्’ धातु से लिया गया है, जिसका अर्थ है- भाषित होना, स्पष्ट वाणी अथवा बोलना।

भाषा (Language): मनुष्य के मुख से निकली वे सार्थक (अर्थयुक्त) ध्वनियाँ हैं जो दूसरों तक अपनी भावनाओं को पहुँचाने का काम करती हैं। अर्थात् स्पष्ट रूप से भाव (अर्थ) बताती हैं, भाषा कहलाती है।

अथवा

ध्वनि प्रतीकों की ऐसी व्यवस्था, जिनके माध्यम से मनुष्य बोलकर व लिखकर अपने विचारों को व्यक्त करता है तथा सुनकर व पढ़कर दूसरों के विचारों को समझता है, भाषा कहलाती है।

अथवा

विद्वानों के अनुसार मानसिक प्रक्रिया को अर्थयुक्त पूरा करने के लिए जिस युक्ति का प्रयोग किया जाता है, उसे ‘भाषा’ कहते हैं।

अथवा

मानव-मुख से उच्चारण की गयी ध्वनि प्रतीकों की ऐसी व्यवस्था, जिसमें शब्दों के अर्थ सार्थक रहते हैं, भाषा कहलाती हैं।

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भाषा के लक्षण:

भाषा के लक्षण: भाषा के निम्नलिखित लक्षण हैं-

  1. यह मानव-मुख से उच्चारित होती है।
  2. इसमें सार्थक ध्वनियाँ प्रयुक्त होती हैं ।
  3. प्रत्येक भाषा में ध्वनि प्रतीक होते हैं।
  4. प्रत्येक भाषा की वाक्य संरचना (बनावट) की अपनी व्यवस्था होती है। शब्द व्यवस्थित (एकत्रित) रूप से जुड़कर वाक्य बनाते हैं।
  5. इसमें शब्दों के अर्थ रूढ़ होते हैं, वे बदलते नहीं हैं। हम हाथी को जिराफ और जिराफ को हाथी या मोर नहीं कह सकते।
  6. यह दूसरों व्यक्तियों तक अपनी बात पहुँचाने का कार्य करती है।

भाषा के प्रकार । Types of Language:

 भाषा का प्रयोग दो प्रकार से किया जाता हैं-

  • व्यक्त भाषा (Expressed Language)
  • अव्यक्त भाषा (Unexpressed Language)

1.व्यक्त भाषा (Expressed Language): मानवों के बीच बोली जाने वाली लिखी जाने वाली या संकेतों के माध्यम से समझाई जाने वाली भाषा व्यक्त भाषा के अंतर्गत आती है।

उदाहरण: हिंदी, अंगरेज़ी, जर्मनी, संस्कृत, उर्दू, गुरुमुखी, तेलगू, गुजराती, पंजाबी, कन्नड़ आदि।

2. अव्यक्त भाषा (Unexpressed Language): सामान्य रूप से मानवों की समझ से बाहर की भाषा, अव्यक्त भाषा कहलाती है।
उदाहरण: पशुओं की भाषा, पक्षियों की भाषा, कोड़े-मकोड़ों की भाषा आदि।

व्यक्त भाषा के रूप

व्यक्त भाषा मुख्य रूप से तीन रूपों में पाया जाता है-

  1. मौखिक भाषा (Spoken Language)
  2. लिखित भाषा (Written Language)
  3. सांकेतिक भाषा (Sign Language)

a. मौखिक भाषा (Spoken Language): जब दो या दो से अधिक व्यक्ति बोलकर अपने मन के भावों या विचारों को एक दूसरे पर प्रकट करते हैं, उसे मौखिक भाषा कहते हैं।

अथवा

वाणी द्वारा बोलकर विचार प्रकट करने का साधन मौखिक या कथित भाषा कहलाता है।

मौखिक भाषा को कथित और उच्चरित भाषा भी कहते हैं।

बोलना और सुनना मौखिक भाषा के रूप हैं।

उदाहरण: अध्यापिका बोलकर छात्रों को पढ़ा रही है।

b. लिखित भाषा (Written Language): जब मनुष्य अपने मन के भावों या विचारों को लिखकर प्रकट करता है, तो उसे लिखित भाषा कहते हैं।

लिखना और पढ़ना लिखित भाषा के रूप हैं।

उदाहरण: राम पत्र लिख रहा है।

वह किताब पढ़ रहा है।

c. सांकेतिक भाषा (Sign Language): जब व्यक्ति संकेतों के माध्यम से अपने विचारों या भावों को प्रकट करता है तो भाषा के इस रूप को, सांकेतिक भाषा कहा जाता है।

उदाहरण: भूख लगने पर बच्चा रोता है।

गूँगे संकेतों द्वारा ही अपने मन के भावों को प्रकट करने का कार्य करते हैं।

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हिंदी भाषा: हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है। यह संस्कृत भाषा की उत्तराधिकारिणी है। भारत में हिंदी भाषा-भाषी जनता की संख्या सबसे अधिक है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसके वक्ता (बोलने वालों) से इसके समझने वालों की संख्या कहीं अधिक है। जो लोग हिंदी बोल नहीं सकते, वे भी प्रायः हिंदी को बड़ी ही आसानी से समझ लेते हैं। इसकी लिपि वैज्ञानिक है। 

हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली तीसरी भाषा है। इसीलिए 14 सितंबर का दिन प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उपभाषा: जब बोली का क्षेत्र बढ़ जाता है और उसमें साहित्य रचना की जाने लगती है तो ‘बोली’ ‘उपभाषा’ बन जाती है।

उदाहरण: ब्रज और अवधी बोलियाँ अब उपभाषाएँ बन चुकी हैं।

हिंदी की उपभाषाओं को पाँच वर्गों में बाँटा गया है-

1. पूर्वी हिंदी: छत्तीसगढ़ी, बहोली और अवधी पूर्वी हिंदी वर्ग की उपभाषाएँ हैं।

2. राजस्थानी: मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती, बागड़ी और मालवी राजस्थानी वर्ग की उपभाषाएँ हैं।

3. बिहारी: मैथिली, मगही अंगिका और भोजपुरी इस वर्ग की मुख्य उपभाषाएँ हैं।

4. पश्चिमी हिंदी: इसके अंतर्गत बुंदेली, खड़ी बोली, कन्नौजी, ब्रजभाषा और हरियाणवी बोलियाँ आती हैं।

5. पहाड़ी वर्ग: गढ़वाली और कुमाऊँनी उपभाषाएँ इस वर्ग में आती हैं।

हिंदी भाषा का मानक रूप: मानक का अर्थ है स्वरूप।

मानक भाषा: भाषा में एकरूपता व स्पष्टता लाने के उद्देश्य से विद्वान व शिक्षाविद् भाषा के जिस रूप को मान्यता प्रदान करते हैं, वह मानक भाषा कहलाती है।

मातृभाषा (Mother Toungue): जो भाषा हम अपने परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत के लिए प्रयोग करते हैं, उसे मातृभाषा कहते हैं।

अथवा

जो भाषा सबसे पहले सीखी जाती है, वह मातृभाषा कहलाती है।

बोली (Dialect): भाषा के बोलने के ढंग को, बोली कहते हैं।

अथवा

किसी क्षेत्र विशेष में, प्रयोग किया जाने वाला भाषा का स्थानीय रूप बोली कहलाता है।

उदाहरण: हरियाणवी, मारवाड़ी, भोजपुरी ये सभी बोलियाँ हैं।

बोली सिर्फ मौखिक रूप से बोलने के काम आती है, इसका साहित्य नहीं होता।

राजभाषा (Official Language): भारतीय संविधान में 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। इसे भारतीय संघ के काम-काज की भाषा बनाया गया।

राष्ट्रभाषा (National Language): संपूर्ण राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषा को राष्ट्रभाषा कहते हैं।

भारतीय भाषाएँ: संस्कृत भारत की प्राचीनतम भाषा है। भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में देश की 22 भाषाएँ, राष्ट्रीय भाषाएँ स्वीकार की गई हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं-

असमिया, उर्दू, उड़िया, कन्नड़, कश्मीरी, गुजराती, तमिल, तेलुगू, पंजाबी, बंगला, मराठी, मलयालम, संस्कृत, सिंधी, हिंदी, बोडो, डोगरी, कोंकणी, नेपाली, मणिपुरी, संथाली मैथिली

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उम्मीद करता हूँ की आपको ये लेख पसंद आया होगा। इस लेख में आपने भाषा से जुड़ी हर जानकारी प्रदान करने की कोशिश की है। अगर कोई जानकारी आपको समझ न आए तो आप हमे Comment करके अपनी उलझन साझा कर सकते है।

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