पूर्ण संख्या किसे कहते है? परिभाषा और सूत्र (Whole Numbers In Hindi)

प्रिय पाठक! इस लेख में हम पूर्ण संख्या किसे कहते है इसके बारे में जानेंगे। जैसा कि आप सभी ने इसके पहले लेख में संख्या पद्धति (number System) के बारे में पढ़ था। उम्मीद करता हूँ की आप सभी को Number system को अच्छी तरह समझ लिया होगा। आज की इस लेख में हम जानेंगे की पूर्ण संख्या क्या है?

पूर्ण-संख्या-किसे-कहते-है

पूर्ण संख्या किसे कहते है?

पूर्ण संख्या (Whole Number) :-प्राकृतिक संख्याओं (1, 2, 3, 4, ……) में शून्य (0) को सम्मिलित करने पर जो संख्याएँ प्राप्त होती हैं, पूर्ण संख्याएँ कहलाती हैं। पूर्ण संख्याओं को W से प्रदर्शित करते हैं।

अथवा

शून्य ‘0’ से लेकर अनंत तक की संख्याओं को पूर्ण संख्याएँ कहते हैं।
उदाहरण: 0, 1, 2, 3, 4, ……।∞ आदि

स्मरणीय बिंदु:
1. शून्य (0) सबसे छोटी एवं पहली पूर्ण संख्या है।
2. सभी प्राकृतिक संख्याएँ पूर्ण-संख्याएँ हैं।
3. चूंकि प्रत्येक पूर्ण संख्या से बड़ी पूर्ण संख्याएँ होती हैं अतः कोई भी पूर्ण संख्या सबसे बड़ी पूर्ण संख्या नहीं होती है।

पूर्ण संख्याओं का संख्या रेखा पर प्रदर्शन

  1. सर्वप्रथम एक रेखा खींचते हैं।
    उदाहरणार्थ:-
Number System In Hindi

  1. फिर उस रेखा पर समान दूरी लेकर उन्हें चिन्हित करते हैं।
    उदाहरणार्थ:-
Number System In Hindi
  1. फिर प्राप्त बिंदुओं के नीचे संख्या 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, ………… निरूपित करते हैं।
    उदाहरण:

क्रमागत पूर्ण संख्याएँ

क्रमागत का शाब्दिक अर्थ:-क्रमागत का शाब्दिक अर्थ है-क्रम + आगत। अर्थात् क्रम से आने वाली संख्याएँ।
क्रमागत संख्याएँ:-क्रम से एक के बाद एक आने वाली संख्याएँ, क्रमागत संख्याएँ कहलाती हैं।
उदाहरणार्थ:-22, 23, 24, …
109, 110, 111, 112, …
287, 288, 289, 290, 291, …
स्मरणीय बिंदु:-1. दो क्रमागत पूर्ण संख्याओं का अंतर (घटाना) सदैव 1 होता है।

तीन क्रमागत पूर्ण संख्याओं में पहली और तीसरी संख्याओं के योगफल का आधा बीच की संख्या होती है।

उदाहरणार्थ:-1. सिद्ध कीजिए कि 57, 58, 59 तीनों क्रमागत संख्याओं में पहली और तीसरी संख्याओं के योगफल का आधा बीच वाली संख्या के बराबर है।
हल:-57 + 59 = 116
116 / 2 = 58

उदाहरणार्थ:-2. तीन क्रमागत पूर्ण संख्या में पहली और तीसरी का योगफल 12 है संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:-पहली और तीसरी संख्या का योगफल = 12
पहली और तीसरी संख्या का योगफल का आधा = 12 / 2 = 6
बीच की संख्या = 6
अतः संख्याएँ = 5, 6, 7


शून्येत्तर संख्याएँ (Non-Zero Numbers) –शून्य को छोड़कर अन्य सभी अंको को शून्येत्तर संख्याएँ कहते हैं।

पूर्ण संख्याओं पर संक्रियाएँ तथा गुणधर्म
पूर्ण संख्याओं में योग का प्रगुण

योग का संवरक प्रगुण:-दो पूर्ण संख्याओं का योगफल सदैव पूर्ण संख्या होता है, यह पूर्ण संख्याओं के योग का संवरक प्रगुण है।
अथवा
यदि a तथा b दो पूर्ण संख्याएँ हों और a + b = c, तो c भी पूर्ण संख्या होती है, यह योग संक्रिया का संवरक प्रगुण है।
उदाहरणार्थ:-11 + 9 = 20 (20 एक पूर्ण संख्या है।

योग का क्रम-विनिमेय प्रगुण

योग का क्रम-विनिमेय प्रगुण:-दो पूर्ण संख्याओं के योगफल पर संख्याओं के क्रम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, यह योग का क्रम-विनिमेय प्रगुण है।
अथवा
यदि a तथा b दो पूर्ण संख्याएँ हों, तो a + b = b + a, यह योग संक्रिया का क्रम-विनिमेय प्रगुण हैं।
उदाहरणार्थ:-14 + 33 = 47
33 + 14 = 47

योग का तत्समक अवयव:

योग का तत्समक अवयव:-किसी पूर्ण संख्या में यदि शून्य को जोड़ा जाता है तो योगफल वही संख्या प्राप्त होती है। इसी कारण शून्य को पूर्ण संख्याओं में योग का तत्समक अवयव कहते हैं।
शून्य को पूर्ण संख्याओं के लिए योज्य तत्समक भी कहते हैं।
अथवा
यदि a कोई पूर्ण संख्या हो, तो a + 0 = 0 + a = a, यह शून्य का योग प्रगुण है। इसी लिए शून्य (0) को पूर्ण संख्याओं में योग का तत्समक अवयव कहते हैं।
उदाहरणार्थ:-3 + 0 = 0 + 3 = 3

योग का साहचर्य प्रगुण:

योग का साहचर्य प्रगुण:-तीन पूर्ण संख्याओं को क्रम में जोड़ते समय किन्हीं दो पूर्ण संख्याओं का समूह पहले बना लेने से योगफल में अंतर नहीं पड़ता है, यह योग संक्रिया का साहचर्य प्रगुण है।
अथवा
यदि a, b तथा c कोई तीन पूर्ण संख्याएँ हो, तो (a + b) + c = a + (b + c) = a + b + c, यह योग संक्रिया का साहचर्य प्रगुण है।
उदाहरणार्थ:– (11+33) +102 = 11+ (33+102) = 11+33+102

पूर्ण संख्याओं पर घटाने का प्रगुण

पूर्ण संख्याओं पर घटाने का प्रगुण
1.घटाने की संक्रिया में संवरक प्रगुण:-यदि a तथा b दो पूर्ण संख्याएँ हैं और a≥b हो, तो (a-b) पूर्ण संख्या होती है, परंतु यदि a<b, (a-b) पूर्ण संख्या नहीं है।
उदाहरणार्थ:-8-5 = 3 (पूर्ण संख्या है)
किंतु 5-8 =-3 (पूर्ण संख्या नहीं है)
अतः घटाने की संक्रिया पूर्ण संख्याओं के लिए संवरक नहीं है।

घटाने की संक्रिया में क्रम-विनिमेय प्रगुण:-यदि a और b दो पूर्ण संख्याएँ हो, तो (a–b) और (b–a) बराबर नहीं है।
उदाहरणार्थ:-21-19 = 2
परंतु 19-21 ≠ 2
अतः घटाने की संक्रिया में क्रम-विनिमेय नियम लागू नहीं होता है।

यह भी पढ़े:

घटाने की संक्रिया में तत्समक अवयव:-यदि a एक शून्येतर पूर्ण संख्या है, तो a–0 = a पूर्ण संख्या है, परंतु 0–a पूर्ण संख्या नहीं है।
उदाहरणार्थ:-25-0 = 25 (पूर्ण संख्या है)
परंतु 0-25 =-25 (पूर्ण संख्या नहीं है)
अतः घटाने की संक्रिया में शून्य (0) तत्समक नहीं है।

घटाने की संक्रिया में साहचर्य प्रगुण:-यदि a, b तथा c तीन पूर्ण संख्याएँ हो, तो a– (b-c) ≠ (a-b) –c,
उदाहरणार्थ:-9– (7-3) = 9–4 = 5
(9-7) –3 = 2–3 =-1
अतः 9– (7-3) ≠ (9-7) –3
अतः घटाने की संक्रिया पूर्ण संख्याओं के लिए साहचर्य नहीं है।
पूर्ण संख्याओं में गुणा का प्रगुण

गुणन का संवरक प्रगुण:-दो पूर्ण संख्याओं का गुणनफल सदैव संख्या होता है। यह गुणन संक्रिया का संवरक प्रगुण है।
अथवा
यदि a तथा b दो पूर्ण संख्याएँ हों और उनका गुणनफल c अर्थात a × b = c हो, तो c भी पूर्ण संख्या होगी। यह गुणन संक्रिया का संवरक प्रगुण है।
उदाहरणार्थ:-5×8 = 40

गुणा का क्रम-विनिमेय प्रगुण:-दो पूर्ण संख्याओं के गुणनफल पर संख्याओं के क्रम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, यह योग का क्रम-विनिमेय प्रगुण है।
अथवा
यदि a तथा b दो पूर्ण संख्याएँ हों, तो a × b = b × a; इसे गुणन संक्रिया का क्रम-विनिमेय प्रगुण कहते हैं।
उदाहरणार्थ:-31×54 = 54×31 = 1674

शून्य का गुणन प्रगुण:-किसी पूर्ण संख्या और शून्य का गुणनफल सदैव शून्य होता है।
अथवा
यदि a कोई पूर्ण संख्या हो, तो a × 0 = 0 × a = 0; इसे शून्य का गुणन प्रगुण कहते हैं।
उदाहरणार्थ:-7×0 = 0×7 = 0

गुणन का तत्समक अवयव:-किसी पूर्ण संख्या और एक का गुणनफल सदैव वही संख्या प्राप्त होती हैं। अतः 1 को गुणन का तत्समक अवयव कहते हैं।
अथवा
यदि a कोई पूर्ण संख्या हो, तो a × 1 = 1 + a = a; इसलिए 1 को गुणन का तत्समक अवयव कहते हैं।
उदाहरणार्थ:-12×1= 12×1 = 12

गुणन का साहचर्य प्रगुण:-तीन पूर्ण संख्याओं को क्रम में जोड़ते समय किन्हीं दो पूर्ण संख्याओं का समूह पहले बना लेने से गुणनफल में अंतर नहीं पड़ता है, यह गुणन संक्रिया का साहचर्य प्रगुण है।
अथवा
यदि a, b तथा c कोई तीन पूर्ण संख्याएँ हो, तो (a × b) × c = a × (b × c) = a × b × c; यह गुणन संक्रिया का साहचर्य प्रगुण है।
उदाहरणार्थ:- (6×14) ×33 = 6× (14×33) = 6×14×33

गुणन संक्रिया का योग पर वितरण:-किसी भी तीन पूर्ण संख्याओं के लिए-
पहली संख्या × (दूसरी संख्या + तीसरी संख्या) = पहली संख्या × दूसरी संख्या + पहली संख्या × तीसरी संख्या
इसे गुणन संक्रिया का योग पर वितरण प्रगुण कहते हैं।
अथवा
यदि a, b तथा c पूर्ण संख्याएँ हो, तो a × (b + c) = a × b + a × c; इसे गुणन संक्रिया का योग पर वितरण प्रगुण कहते हैं।
उदाहरणार्थ:-4× (8+17) = 4×8 + 4×17

गुणन संक्रिया का अंतर (घटाना) पर वितरण:-किसी भी तीन पूर्ण संख्याओं के लिए-
पहली संख्या × (दूसरी संख्या–तीसरी संख्या) = पहली संख्या × दूसरी संख्या–पहली संख्या × तीसरी संख्या
इसे गुणन संक्रिया का अंतर पर वितरण प्रगुण कहते हैं।
अथवा
यदि a, b तथा c पूर्ण संख्याएँ हो, तो a × (b–c) = a × b–a × c; इसे गुणन संक्रिया का अंतर पर वितरण प्रगुण कहते हैं।
उदाहरणार्थ:-3 × (7-9) = 3×8–3×9
पूर्ण संख्याओं में विभाजन (भाग) की संक्रिया

भाग की संक्रिया में संवरक प्रगुण:-यदि a तथा b शून्येतर (b ≠ 0) कोई दो पूर्ण संख्याएँ हों, तो a ÷ b = a / b का पूर्ण संख्या होना आवश्यक नहीं है।
उदाहरणार्थ:-24÷2 =12 (पूर्ण संख्या है)
परंतु 19÷2 = 19 / 2 (पूर्ण संख्या नहीं है)
अतः विभाजन की संक्रिया पूर्ण संख्याओं के लिए संवरक नहीं है।

शून्य से पूर्ण संख्याओं में भाग:-किसी पूर्ण संख्या में शून्य से भाग परिभाषित नहीं है।
उदाहरणार्थ:-10÷0 (परिभाषित नहीं है)

पूर्ण संख्याओं में 1 से भाग:-किसी पूर्ण संख्या में 1 से भाग देने पर भागफल सदैव वही संख्या प्राप्त होती है।
अथवा
यदि a कोई पूर्ण संख्या हो, तो a÷1 = a
उदाहरणार्थ:-55÷1 = 55

शून्य में किसी शून्येतर पूर्ण संख्या से भाग:-शून्य में किसी शून्येतर पूर्ण संख्या से भाग देने पर भागफल सदैव शून्य प्राप्त होता है।
अथवा
यदि a कोई शून्येतर पूर्ण संख्या है, तो 0 ÷ a = 0
उदाहरणार्थ:-0÷23 = 0

किसी शून्येतर पूर्ण संख्या में उसी शून्येतर पूर्ण संख्या से भाग:-किसी शून्येतर पूर्ण संख्या में उसी शून्येतर पूर्ण संख्या से भाग देने पर भागफल सदैव 1 आता है।
अथवा
यदि a कोई शून्येतर पूर्ण संख्या है, तो a÷a = 1

यह भी पढे: Tense in hindi, Present Indefinite Tense, Present Continuous Tense, Present Perfect Tense तथा Present Perfect Continuous Tense

उदाहरणार्थ:-47÷47 = 1

इस लेख में:

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